Tuesday, February 8, 2011

लखनऊ विश्वविधाला  में  आयोजीत पुस्तक  मेला 
लखनऊ - ७ २ ११ 
लखनऊ विश्वविधालय  में ५ फ़रवरी  को नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा उत्तर  प्रदेश भाषा संस्थान  के सहयोग   राष्टीय  
पुस्तक मेला आयोजित  किया गया है | मेले में देश के  कई प्रमुख प्रकाशक व  वितरको ने भाग लिया है मेला १३ फरवरी तक चलेगा तथा यह सुबह ११ बजे से रात्रि ८ बजे तक खुला रहेगा| मेले में में प्रवेश निशुल्क है | इस मेले में लगभग 116  दुकाने है | जिसपर राष्टीय पुस्तक ट्रस्ट इंडिया न्यू डेल्ही क प्रकाशक दीनेश का कहना है के की अब तक उनकी १ लख किताबे बिक चुकी है | जिसमे विज्ञान साहित्य एवम सामान्य ज्ञान की कई किताबे अधिक बिक रही है| जिसमें युवाओ ने खासतौर पर बढ़ कर हिस्सा लिया है |
मेडिकल कॉलेज के डॉ. दीना नाथ  जो की स्वास्थ से सम्बंधित पुस्तके लिखते है जो के अभी तक ३० पुस्तके लिख चुके है | उनका कहना है की उनकी अभी तक १०० किताबे  बिक चुकी है  जिसमे खासतौर   पर घर क डॉक्टर थ्रेड  आई बुक ज्यादा मांग में है| इन सारी बुको के दाम उन्होंने एक सामान्य व्यक्ति को धयान में रखते हुए ही निधारित किये है | इस पुस्तक मेले में बाल साहित्य की किताबे अधिक मांग   में है |  पाठको का रुझान हलकी फुलकी किताबो की तरफ ज्यादा है|पाठक  धर्म और वेद पुरंदो की किताबे  को ज्यादा खरीद रहे है | वही कंप्यूटर और विज्ञानं की किताबे कम पढी जा रही है |
ललित कला अकादेमी के पुस्तक वितरक तेज शंकर का कहना है की कला से सम्बंधित किताबे कम और उनकी प्रिंट ज्यादा खरीद रहे है | वही कल्पना प्रसाद   जो की पुस्तक विक्रेता है उनका कहना है की PERSONALITY DEVLOPMENT  और स्पीकिंग कोर्सेस से सम्न्धित ज्याद किताबे खरीदी जा रही है | 
बहुत सारे प्रकाशको का कहना है कि अक्टूबर में आयोजित किया गया  था | वह के मुकाबले लखनऊ विश्वविधालय में राष्टीय पुस्तक मेले में भीड़ कम है | उन्हें लगता  है की शायद बहुत से लोंगो पता ही कि पुस्तक मेला लखनऊ विश्वविधालय में आयोजित किया गया है | वही बहुत सारे प्रकाशकों का कहना है कि पाठको का रुझान किताबो की तरफ कम होता जा रहा है | इसी वजह से मेले के तीसरे दिन भी पाठको की भीड़ का पता नही है | हिंदी संश्थान की शोभना  कौर का यही मानना है कि यही स्थीती रही तो बुक स्टाल का पैसा देना भी मुश्किल हो सकता है | 
इन सभी बुक स्टाल पर बाल साहित्य सबसे ज्यादा मांग में है | नई किताबो में मार्क्स की पूंजी, इलेक्ट्रानिक मीडिया,नवजागरण पत्रकारिता और पत्रकारिता  और भारत उपलब्ध है | इन सभी किताबो में महिलाओ की स्थिती पर अधारित किताबें अधिक मिल रही है | 
वही रामेश्वर झा जो कि इंटरनेशनल  योग सोसाइटी के पब्लिशर है उनका कहना है कि योग से सम्बंधेत ज्यादा किताबें अधिक डीमांड में है | उनका कहना लखनऊ में अधात्मिक प्रकृति के व्यक्ती है जो कि गाजियाबाद की तुलना में अधिक है | किताबो के साथ सीडी भी २५%               
  

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