Sunday, March 13, 2011

बातो बातो में बदलती ज़िन्दगी

जी हां हम बात कर रहे है बातो बातो में बदलती ज़िन्दगी की | आप को नही लगता  हमारी ज़िन्दगी में जो कुछ भी बदलाव आ रहा है या हो रहा है उसमें कुछ हद तक हमारी बाते ही होती है | अब जैसे किसी ने कहा के मुझे फिल्में देखना बहुत पसंद है  तो उसमें फिल्म की बात हुई फिल्म की बात होने से जाहिर है की ज़िन्दगी का जुड़ाव तो जरूर होगा, रंग होगे, सपने होगे , गीत होंगे और डांस होगा मतलब एक शब्द या एक वाक्य में कहू तो बदलते दौर  की वो सारी चीजे होगी जिसे हम अपनी ज़िन्दगी जोड़ना कहते है अब चाहे वो विज्ञापन क्यों न हो क्योंकी  फिल्म है तो एड होना तो जरूरी है ऐसे भला टी.वी और सीरिल्स  की बातें तो जरूर होगी| सीरिल्स है तो साजिस ,कहानी और क्यों भला हम कैसे भूल सकते है इनका होना तो अनिवार्य है भला हमारी ज़िन्दगी में भी तो ये सारी चीजे होती ही  है फिल्मो में भी हमेशा सोसाइटी से जुड़े  ही मुद्दे लिए जाते है और वो समस्याए भी आम आदमी के ज़िन्दगी से जुडी होती है जिससे काफी हद तक ये समस्याए सुलझ जातीं है| और हमारी आपकी की ज़िन्दगी में बदलाव आता है |        

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