१ अप्रैल को पूरे देश में लोंग एक दूसरे को अप्रैल फूल यानी मुर्ख दिवस मनाते है. लेकिन मुझे लगता है शायद इस देश की जनता को रोज मूर्ख बनाया जाता है. कभी नेता इलेक्शन से पहले किये वादे के लिए मूर्ख बनाता है तो कभी अधिकारी दफ्तरों के रोज चक्कर लगाने के लिए मूर्ख बनाते है, कभी सैलरी के नाम पर तो कभी मोह्ल्ले में हो रहे सुधारों के नाम पर. हम हमेशा ही मूर्ख बन जाते है और हमेशा ही मूर्ख दिवस मनाते है. और किसी ना रूप में रोज मूर्ख बन जाते है. अब आर, टी , ई, को ही ले लीजिए जब क़ानून लागू हुआ तो हमें लगा की गाँवों में भी शिक्षा का स्तर बढेगा लेकिन, न ही शिक्षा का स्तर बढ़ा और ना ही कानून लागू होने से १४ साल के बच्चो को शिक्षा का अधिकार मिला.सरकार ने भले ही पोलिथीन पर बैन कर दिया हो लेकिन आज देख लीजिए पोलिथीन बैग मार्केट में उसी मात्रा में दिख रहे है | जैसा की पहले धूरूम्पान की चीजो आदि पर भी कितने प्रतिबन्ध लगा दिए गये है लेकिन ये सारी चीजे मार्केट में वैसे ही उपलब्ध है जैसे की पहले बिक रही थी. दूकानों पर भले ही गूठके भले ही नदारद हो पर गैर कानूनी रूप से ज्यादा पैसे में सब मिल रहा है. लोंग भले ही इस दिन एक दुसरे को हसने हसाने के तरीके ढूढ़ रहे हो पर हम रोज किसी न किसी रूप में अप्रैल फूल मनाते है.
very true said....
ReplyDelete@ अंकिता जी सोचने लायक विषय पर बात की आपने आज अच्छा है अगर सब आप की तरह सोचने लगे तो देश जरुर सुधरेगा
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